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चित्रों वाली कहानी

गौरचन्द्र का जन्म

छोटे · 2–6 साल

15 पन्ने

दयालु ब्राह्मण जगन्नाथ मिश्र और शची देवी नवद्वीप में रहते थे। वे प्रेम से भगवान की सेवा करते थे।

कहानी का पूरा पाठ

चित्र 1. दयालु ब्राह्मण जगन्नाथ मिश्र और शची देवी नवद्वीप में रहते थे। वे प्रेम से भगवान की सेवा करते थे।

चित्र 2. शाम को गंगा के ऊपर पूर्णिमा का बड़ा चाँद निकला। उसी समय चंद्रग्रहण शुरू हुआ।

चित्र 3. परंपरा के अनुसार लोग पवित्र नदी में उतरे। सब ऊँची आवाज़ में हरि और कृष्ण के नाम बोल रहे थे।

चित्र 4. पवित्र नाम नदी के किनारों, गलियों और आँगनों में गूँज उठा। जो लोग कभी-कभी ही प्रार्थना करते थे, वे भी साथ गाने लगे।

चित्र 5. शची देवी के घर सुंदर सुनहरे शिशु प्रकट हुए। वे स्वयं श्री चैतन्य महाप्रभु थे।

चित्र 6. उनका मुख सुनहरी पूर्णिमा के चाँद जैसा चमक रहा था। इसलिए भक्तों ने प्रेम से उन्हें गौरचन्द्र—सुनहरा चाँद—कहा।

चित्र 7. देवता भगवान के दर्शन करने अदृश्य रूप से आए। घर प्रकाश और आनंद से भर गया।

चित्र 8. स्त्रियाँ चावल, हल्दी, केले और शुभ उपहार लाईं। उन्होंने शिशु को लंबे और सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया।

चित्र 9. अद्वैत आचार्य ने समाचार सुनकर समझ लिया कि उनकी प्रार्थना का उत्तर आ गया है। वे कृतज्ञता से नाचने लगे।

चित्र 10. हरिदास ठाकुर भी आनंद से पवित्र नाम का जप कर रहे थे। वे जानते थे कि भगवान की कृपा सबके लिए आई है।

चित्र 11. जगन्नाथ मिश्र अपने बेटे को प्यार से देखते रहे। शची देवी ने शिशु को हृदय से लगा लिया।

चित्र 12. बाहर लोग अब भी पुकार रहे थे, “हरि! हरि!” इस तरह भगवान ने अपने जीवन का पहला विशाल कीर्तन कराया।

चित्र 13. ग्रहण समाप्त हुआ और चाँद फिर साफ चमकने लगा। लेकिन नवद्वीप में एक और सुनहरा चाँद उग चुका था।

चित्र 14. यह चाँद बादलों के पीछे नहीं छिपेगा। उसका प्रकाश पूरे संसार के हृदयों को छुएगा।

चित्र 15. सब लोग आनंदित थे, पर अभी महान रहस्य नहीं जानते थे। उनके नगर में वे जन्मे थे जो संसार को कृष्ण के नाम गाना सिखाएँगे।

प्रामाणिक स्रोत

कथा और उसकी छोटी आध्यात्मिक शिक्षा को श्रील प्रभुपाद की इन पुस्तकों से जाँचा गया है:

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