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चित्रों वाली कहानी

चोर निमाई को घर लौटा देते हैं

छोटे · 2–6 साल

15 पन्ने

एक दिन छोटे निमाई घर के पास खेल रहे थे। उनके हाथ-पाँव के सोने के गहने धीरे-धीरे झनक रहे थे।

कहानी का पूरा पाठ

चित्र 1. एक दिन छोटे निमाई घर के पास खेल रहे थे। उनके हाथ-पाँव के सोने के गहने धीरे-धीरे झनक रहे थे।

चित्र 2. दो चोरों की नज़र उन कीमती गहनों पर पड़ी। उन्होंने बालक को किसी सुनसान जगह ले जाने की योजना बनाई।

चित्र 3. एक चोर ने प्यार से निमाई को बुलाकर मिठाई दी। दूसरे ने बालक को अपने कंधों पर बैठा लिया।

चित्र 4. निमाई ऊपर से शांति से गलियों को देखते रहे। उन्होंने चोरों को वहीं ले जाने दिया, जहाँ वे स्वयं जाना चाहते थे।

चित्र 5. चोर सोच रहे थे कि वे अपने ठिकाने की ओर जा रहे हैं। लेकिन हर जाना-पहचाना रास्ता उन्हें चुपके से वापस मोड़ रहा था।

चित्र 6. वे पेड़ों, घरों और घाटों के पास से गुज़रे। उन्हें पूरा विश्वास था कि रास्ता सही है।

चित्र 7. उधर शची माता को बेटा आँगन में नहीं मिला। माता-पिता और पड़ोसी उन्हें खोजने पूरे नवद्वीप में निकल पड़े।

चित्र 8. लोग पुकारते रहे, “निमाई! निमाई!” शची माता कृष्ण से प्रार्थना करती रहीं और आशा बनाए रखीं।

चित्र 9. आखिर चोर एक घर के सामने पहुँचे। उन्हें लगा कि यह उनका अपना आँगन है।

चित्र 10. “हम पहुँच गए!” कहकर उन्होंने निमाई को नीचे उतारा। बालक तुरंत अपनी माता की ओर दौड़े।

चित्र 11. चोरों ने निमाई के घरवालों और पड़ोसियों को देखा। तभी उन्हें समझ आया कि वे बालक को उसके अपने घर ले आए हैं।

चित्र 12. डरकर वे भाग गए और एक भी गहना नहीं ले पाए। उनकी बुरी योजना से बालक को कोई हानि नहीं हुई।

चित्र 13. शची माता ने बेटे को कसकर हृदय से लगा लिया। जगन्नाथ मिश्र ने रक्षा के लिए कृष्ण को धन्यवाद दिया।

चित्र 14. जो गलत रास्ता चुनता है, भगवान उसे भी अच्छाई की ओर मोड़ सकते हैं। उस दिन चोरों ने अपने ही हाथों से निमाई को परिवार तक पहुँचा दिया।

चित्र 15. शाम को घर फिर शांत हो गया। अपने परिवार के प्रेम से घिरे निमाई मुस्करा रहे थे।

प्रामाणिक स्रोत

कथा और उसकी छोटी आध्यात्मिक शिक्षा को श्रील प्रभुपाद की इन पुस्तकों से जाँचा गया है:

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