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चित्रों वाली कहानी

गौर और निताई का मिलन

छोटे · 2–6 साल

15 पन्ने

नवद्वीप लौटकर निमाई शाम के कीर्तन के लिए मित्रों को बुलाते थे। श्रीवास का आँगन कृष्ण के नामों से भर जाता था।

कहानी का पूरा पाठ

चित्र 1. नवद्वीप लौटकर निमाई शाम के कीर्तन के लिए मित्रों को बुलाते थे। श्रीवास का आँगन कृष्ण के नामों से भर जाता था।

चित्र 2. उसी समय एक लंबे और तेजस्वी यात्री ने नगर में प्रवेश किया। वे भगवान के नित्य साथी नित्यानंद प्रभु थे।

चित्र 3. नित्यानंद नंदन आचार्य के घर ठहरे। वे उस मिलन की चुपचाप प्रतीक्षा कर रहे थे, जिसकी चाह उन्हें बहुत वर्षों से थी।

चित्र 4. निमाई ने अनुभव किया कि एक महान भक्त नवद्वीप आए हैं। उन्होंने मित्रों से उस अतिथि को खोजने के लिए कहा।

चित्र 5. भक्तों ने गलियाँ, बाज़ार और गंगा के किनारे खोजे। लेकिन नित्यानंद कहीं दिखाई नहीं दिए।

चित्र 6. तब निमाई स्वयं सबको नंदन आचार्य के घर ले गए। मित्र अभी नहीं जानते थे कि वहाँ कौन मिलेगा।

चित्र 7. द्वार खुला और गौर ने निताई को देखा। कुछ क्षण दोनों स्थिर खड़े एक-दूसरे को देखते रहे।

चित्र 8. नित्यानंद ने अपने प्रिय भगवान को पहचान लिया। निमाई ने अपने नित्य साथी बलराम को पहचान लिया।

चित्र 9. श्रीवास ने कृष्ण की सुंदरता पर एक श्लोक सुनाया। भगवान के प्रेम में नित्यानंद को बाहर की दुनिया का ध्यान नहीं रहा।

चित्र 10. गौर ने उन्हें बहुत सावधानी से संभाला। भक्तों ने दोनों को घेर लिया और पवित्र नाम गाने लगे।

चित्र 11. शीघ्र ही गौर और निताई साथ-साथ नाच रहे थे। उनके मिलन का आनंद पूरे घर में फैल गया।

चित्र 12. मिलकर कृष्ण की सेवा करने में अधिक आनंद है—उनकी कथा सुनना, नाम गाना और भक्तों की सहायता करना। गौर और निताई सबको यही सिखाते थे।

चित्र 13. निमाई ने नित्यानंद और हरिदास से घर-घर जाने को कहा। वे लोगों को कृष्ण का नाम लेने के लिए बुलाते थे।

चित्र 14. हर द्वार तुरंत नहीं खुलता था। फिर भी निताई क्रोधित नहीं हुए और सबके मंगल की इच्छा करते रहे।

चित्र 15. सुनहरे गौर और दयालु निताई फिर एक साथ थे। अब संकीर्तन की लहर और भी दूर तक जा सकती थी।

प्रामाणिक स्रोत

कथा और उसकी छोटी आध्यात्मिक शिक्षा को श्रील प्रभुपाद की इन पुस्तकों से जाँचा गया है:

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