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चित्रों वाली कहानी

हँसमुख और जिज्ञासु निमाई

छोटे · 2–6 साल

15 पन्ने

समय बीता और छोटे निमाई विद्यालय जाने लगे। उनका शरीर बड़ा हो गया, पर सुंदर गहरी आँखें और सुनहरी आभा वैसी ही रहीं।

कहानी का पूरा पाठ

चित्र 1. समय बीता और छोटे निमाई विद्यालय जाने लगे। उनका शरीर बड़ा हो गया, पर सुंदर गहरी आँखें और सुनहरी आभा वैसी ही रहीं।

चित्र 2. शिक्षक गंगादास पंडित ताड़पत्रों पर अक्षर लिखते थे। निमाई पाठ बहुत जल्दी याद कर लेते।

चित्र 3. वे बहुत प्रश्न पूछते और शब्दों के नए अर्थ खोज लेते। कभी-कभी बड़े विद्यार्थी भी उनके प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाते।

चित्र 4. पढ़ाई के बाद लड़के गंगा की ओर दौड़ते। गंभीर पाठ हँसी, पानी की बौछार और खेल में बदल जाता।

चित्र 5. निमाई मित्रों से हँसी-मज़ाक करना पसंद करते थे। पर शाम को वे फिर ग्रंथ खोलकर मन लगाकर पढ़ते।

चित्र 6. बड़े भाई विश्वरूप अक्सर कृष्ण की कथाएँ सुनते थे। निमाई ध्यान से उनके पास बैठते।

चित्र 7. एक दिन विश्वरूप ने भगवान की सेवा में पूरा जीवन लगाने के लिए घर छोड़ दिया। माता-पिता उन्हें बहुत याद करते थे।

चित्र 8. जगन्नाथ मिश्र को डर हुआ कि पढ़ाई निमाई को भी घर से दूर ले जाएगी। इसलिए उन्होंने कुछ समय के लिए बेटे की पढ़ाई रोक दी।

चित्र 9. विद्यालय के बिना निमाई और भी अधिक शरारत करने लगे। परिवार ने समझा कि उनके चंचल मन को अच्छे काम और पढ़ाई की ज़रूरत है।

चित्र 10. पिता ने उन्हें फिर पढ़ने की अनुमति दी। जल्द ही निमाई स्वयं दूसरे लड़कों को व्याकरण समझाने लगे।

चित्र 11. फिर जगन्नाथ मिश्र बहुत बीमार पड़े और इस संसार से चले गए। शची माता बहुत दुखी हुईं।

चित्र 12. निमाई माता के पास रहे और घर की देखभाल करने लगे। अब उनका ज्ञान केवल पाठ में ही नहीं, सहायता करने में भी काम आया।

चित्र 13. बच्चे का शरीर बढ़ता और बदलता है, पर आत्मा वही रहती है। हमारी अच्छी योग्यताएँ सबसे सुंदर तब बनती हैं, जब उनसे हम दूसरों की सहायता करते हैं।

चित्र 14. दिन में निमाई विद्यार्थियों को पढ़ाते और शाम को माता के लिए ज़रूरी वस्तुएँ लाते। हँसमुख बालक अब देखभाल करने वाला युवक बन रहा था।

चित्र 15. नवद्वीप उन्हें निमाई पंडित के नाम से जानता था। लेकिन उनके सामने अभी एक और भी बड़ा सत्य प्रकट होना था।

प्रामाणिक स्रोत

कथा और उसकी छोटी आध्यात्मिक शिक्षा को श्रील प्रभुपाद की इन पुस्तकों से जाँचा गया है:

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