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चित्रों वाली कहानी

जब कृष्ण ने मिट्टी खाई

2–7 साल

16 पन्ने

नन्हे कृष्ण मिट्टी चख लेते हैं — और जब माँ यशोदा उनके मुँह में झाँकती हैं, तो उन्हें वहाँ पूरा ब्रह्मांड दिखाई देता है।

कहानी का पूरा पाठ

गोकुल यमुना नदी के किनारे एक अद्भुत जगह है — चारों ओर हरे-भरे चरागाह, खिले हुए बाग़ और पक्षियों के गीतों से गूँजते सुगंधित वन। यहीं कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और अपनी दिव्य लीलाओं और मधुर मुस्कान से गोकुल को भर दिया।

गोकुल के एक हरे मैदान में बच्चे साथ मिलकर खेल रहे थे। खुशी से चमकती आँखों वाले कृष्ण हँस रहे थे और बलराम को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।

खेलते-खेलते थककर कृष्ण घास पर बैठ गए, मिट्टी को देखा और अचानक सोचा कि इसका स्वाद कैसा होगा। उन्होंने मुट्ठी भर मिट्टी उठाई और मुँह में रख ली, मानो वह सबसे स्वादिष्ट मिठाई हो।

“कृष्ण, मिट्टी मत खाओ, वरना पेट में दर्द होगा! अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं माँ यशोदा को बता दूँगा!” — बलराम ने चिंता से चेताया।

पर कृष्ण ने बलराम की बात नहीं मानी और मिट्टी खाते रहे। तब बलराम उन्हें माँ के पास ले गए।

“माँ यशोदा, कृष्ण मिट्टी खा रहा था!” — बलराम ने शिकायत की। उस समय माँ यशोदा दही जमा रही थीं। यशोदा चकित हो गईं: “कृष्ण?! तुमने मिट्टी खाई! बलराम, क्या यह सच है?”

कृष्ण ने बड़ी-बड़ी मासूम आँखों से माँ की ओर देखा, मानो कुछ हुआ ही न हो। यशोदा ने कड़ाई से पूछा: “कृष्ण, क्या तुमने मिट्टी खाई है? तुम्हारे सारे दोस्त और बलराम भी यही कह रहे हैं!”

कृष्ण ने मुस्कुराते हुए ‘न’ में सिर हिलाया: “माँ, ये लड़के और मेरे बड़े भाई बलराम सच नहीं कह रहे! मैंने कोई मिट्टी नहीं खाई!”

यशोदा ने अविश्वास से कहा: “ठीक है, अगर तुमने मिट्टी नहीं खाई, तो मुँह खोलो, मैं देखती हूँ।”

कृष्ण ने रूठने का नाटक किया, पर फिर सिर हिलाते हुए मुँह पूरा खोल दिया। यशोदा ने कृष्ण के मुँह में झाँका — और अचानक ठिठक गईं।

उन्होंने उसके भीतर पूरा संसार देखा — पहाड़, नदियाँ, बादल, तारे और सारे ब्रह्मांड।

उन्होंने स्वयं को भी अपने बेटे के पास खड़ा देखा। माँ यशोदा बहुत हैरान हो गईं!

यशोदा ने मन में सोचा: “यह क्या है? सपना या सच? कहीं यह माया तो नहीं? मेरे नन्हे बेटे के भीतर पूरा ब्रह्मांड कैसे समा सकता है?”

अचानक माँ यशोदा को समझ आने लगा कि कृष्ण वास्तव में कौन हैं। लगता था कि वे स्वयं भगवान हैं, जिनका स्वभाव और जिनकी लीलाएँ पूरी तरह समझना कठिन है। उन्होंने ही सब कुछ रचा है — ब्रह्मांड, अंतरिक्ष, ग्रह, मनुष्य, पशु और पेड़-पौधे। माँ यशोदा का मन हुआ कि वे कृष्ण को प्रणाम करें।

पर फिर उन्होंने कृष्ण का कोमल, मुस्कुराता चेहरा देखा और पल भर में सब भूल गईं! उनके हृदय में अपने प्यारे बेटे के लिए माँ का प्रेम फिर जाग उठा। और वे फिर भूल गईं कि कृष्ण भगवान हैं, सबके रचयिता।

माँ यशोदा ने कृष्ण को गोद में बिठाया और कसकर गले लगा लिया। कृष्ण ने भी खुशी से अपनी प्यारी माँ को गले लगा लिया। दोनों यूँ ही गले मिले बैठे रहे, सुख और प्रेम से घिरे हुए, और बाकी बच्चे मैदान में खेलते रहे।

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