चित्रों वाली कहानी
राधारानी और सियारिन
3–8 साल
कुछ लड़के एक भूखी सियारिन को उसकी माँद में फँसाकर आग लगा देते हैं। राधारानी उसकी मदद को दौड़ती हैं — सभी जीवों के प्रति दया की कहानी।
कहानी का पूरा पाठ
वृंदावन एक बहुत ही अनोखी जगह है, और वहाँ रहने वाले भी अनोखे हैं। जैसे, वहाँ सुंदर तोते रहते हैं, जो श्रीमती राधारानी की सेवा करते हैं।
व्रज में कुछ भी होता है, तो तोते सबसे पहले राधारानी को बताते हैं।
वृंदावन के घने जंगलों में, और ख़ास तौर पर गोवर्धन पर, मोर रहते हैं, जिनके शानदार पंख सबका मन मोह लेते हैं।
जैसे ही मोर कृष्ण की बाँसुरी की आवाज़ सुनते हैं, वे काँपने लगते हैं और अपने सुंदर पंख फैला देते हैं।
हर मोर का सपना है कि कृष्ण उसी का पंख पहनें।
और कभी-कभी वे प्रतियोगिता करते हैं, ताकि अपनी पूँछ के सबसे सुंदर पंख से कृष्ण को प्रसन्न कर सकें।
पर वृंदावन में ऐसे जानवर भी रहते हैं, जो देखने में इतने अच्छे नहीं लगते — जैसे सियार। वे रात को हुआँ-हुआँ करके बच्चों को डराते हैं, इसलिए वहाँ के लोग अक्सर उन्हें पसंद नहीं करते और भगा देते हैं।
एक दिन कुछ लड़कों ने एक भूखी सियारिन को खाना ढूँढते देखा और उसके साथ एक क्रूर मज़ाक करने की सोची।
वे उस पर पत्थर और डंडे फेंकने लगे और बेचारी सियारिन को एक सँकरी माँद में खदेड़ दिया।
अपनी जीत पर खुश होकर लड़कों ने सूखे पत्ते, टहनियाँ और लकड़ियाँ इकट्ठी कीं और उस बेकसूर जानवर को सज़ा देने के लिए माँद के मुँह पर आग लगा दी।
जब धुएँ की गंध सियारिन तक पहुँची, तो वह दर्द से कूँ-कूँ करने लगी। यह सुनकर लड़के खुश हो गए, मुट्ठियाँ हिलाने लगे और ज़ोर-ज़ोर से बातें करने लगे कि अब क्या होगा।
आग सियारिन के पास आती जा रही थी, और वह उस सँकरी माँद में हिल भी नहीं पा रही थी। वह हताश होकर चीख़ने लगी।
यह पुकार तुरंत श्रीमती राधारानी ने सुन ली। अपनी सखियों और तोतों के साथ वे झट से उस जगह पहुँचीं, जहाँ जानवर रो रहा था।
बच्चों की करतूत देखकर वृंदावन की रानी को गुस्सा आ गया, और उन्होंने सखियों से कहा कि उन क्रूर लड़कों को भगा दें।
अपनी कोमल हथेलियों से आग की लपटें बुझाकर श्रीमती राधारानी ने सियारिन को पुकारा। अब भी कूँ-कूँ करती हुई सियारिन ने माँद से अपनी नाक बाहर निकाली। “बाहर आ जाओ, डरने की कोई बात नहीं,” — श्री राधिका ने प्यार से कहा। — “अब तुम सुरक्षित हो। वे लड़के तुम्हें फिर कभी नहीं छुएँगे।”
तभी गोपियों ने स्वादिष्ट प्रसाद निकाला और सियारिन को खिलाया। और तोतों ने उन लड़कों के चेहरे अच्छी तरह याद कर लिए और वचन दिया कि अगर उन्होंने फिर कभी किसी को सताया, तो वे श्री राधिका को बता देंगे।
कृतज्ञ सियारिन श्रीमती राधारानी के चरणों में लेट गई। उसकी खाल जगह-जगह से ज़ख़्मी थी। उसकी आँखें लाल थीं, पंजे घायल थे, और वह बहुत दुबली दिख रही थी।
पर राधारानी सबसे दयालु और करुणामयी हैं। उन्होंने प्यार से सियारिन को सहलाया और उस पर अपनी कृपा बरसाई।
फिर श्रीमती राधारानी ने तोतों से कहा कि अगर वृंदावन में किसी और को भी कोई तकलीफ़ हो, तो उन्हें तुरंत बताएँ।
इसके बाद राधा चली गईं। और सियारिन बहुत देर तक इस चमत्कार के लिए कृतज्ञता से अपनी रक्षक को जाते हुए देखती रही।
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